ग़ज़ल

Ganga Shrir, Panthi, Gulmi, गङ्गा श्री पन्थी, pallawa, पल्लव

गङ्गा श्री पन्थी

आओ किसी का यूँही इंतजार करते हैं..!
चाय बनाकर फिर कोई बात करते हैं..!!

उम्र पचास के पार हो गई हमारी..!
बुढ़ापे का इस्तक़बाल करते है..!!

कौन आएगा अब हमको देखने यहां..!
एक दूसरे की देखभाल करते है..!!

 

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ओ पुरुष मेरे मित्रोः !!

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गङ्गा श्री पन्थी

गङ्गा श्री पन्थी की म्यासेन्जर से प्राप्त रचना !!!
जो कभी चाहिए हो किसी स्त्री की देह तो बिना किसी लाग-लपेट के सीधे जाकर उससे विनम्रता से याचना कर लेना । याचना स्वीकार हो जाये तो अनुग्रह मानना, न स्वीकार हो तो उसकी इच्छा का सम्मान करते हुए लौट जाना, जहां से आये थे। लेकिन जो कभी चाहिए स्त्री की देह तो प्रेम के रास्ते पर मत चलकर जाना, अपनी कामना को प्रेम के आवरण में लपेटकर मत प्रस्तुत करना। ऐसा करके देह तो अवश्य ही पा लोगे लेकिन साथ में देह के भीतर तुम्हारे प्रेम में डूबी उस स्त्री की आत्मा भी आएगी जिसकी तुम्हें ज़रूरत नही होगी और उस ठुकराई हुई निर्दोष आत्मा के गुनहगार तुम ता-उम्र रहोगे ।

 

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