हिन्दी कविताः मुझे याद हैं

dr. Vijaya, Bijaya, Pandit, Merath, विजय पंडित, pallawa, पल्लव

विजय पंडित

वो लम्हे
आते जाते हर सफर में
होती थी जब
किताब सबके हाथ में
सच्चे मित्र जैसे
हर पल
साथ निभाती पुस्तके
राह दिखाती..
पुस्तको में
वो खतों का
आदान प्रदान.. –

 

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हिन्दीमा प्रेरक प्रसंग

dr. Vijaya, Bijaya, Pandit, Merath, विजय पंडित, pallawa, पल्लव

विजय पंडित

नगर की प्रसिद्ध वैश्या की गली से एक योगी जा रहा था कंधे पर झोली डाले। योगी को देखते ही एक द्वार खुला। सामने की महिला ने योगी को देखा। ध्यान की गरिमा से आपूर, अंतर मौन की रश्मियों से भरपूर। योगी को देखकर महिला ने निवेदन किया गृह में पधारने के लिए। उसके आमन्त्रण में वासना का स्वर था।योगी ने उत्तर दिया,” देखती नहीं झोली में दवाएं पड़ी हैं, गरीबों में बांटनी हैं उन्हें रोगों से मुक्त करना है। हमारे और तुम्हारे कार्य में अंतर है तुम रोग बढ़ाती हो, हम रोग मिटाते हैं। तुम शरीर और वासना की भाषा बोलती हो, हम सत्य और बोध की।”

 

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