इसमें भी कुछ भला है

Dr., Raj, Kishor, Saxena, Raj,राज किशोर सक्सेना ‘राज’, pallawa, पल्लव

 

हिन्दी बाल कथा !!
बहुत समय पहले की बात है उत्तर भारत के सैकड़ों किलोमीटर लम्बे मैदान के मध्य कोसी नदी के किनारे एक रोहिला रियासत थी जिसकी राजधानी रामपुर थी और यह नवाबी, रियासत रामपुर के नाम से जानी जाती थी । रामपुर नगर से लगभग तेरह किलोमीटर दूर खेमपुर नाम का एक बड़ा गांव था जिसमें बुद्धसेन नामक बुद्धिमान व्यक्ति रहता था । वह अच्छी खासी खेती का मालिक था । एक सुगढ पत्नी, एक बेटा, एक बेटी और एक शानदार घोड़ा जिसे उसने बचपन से बड़े प्यार से पाला था, उसके परिवारजन थे । बुद्धसेन बहुत बुद्धिमान,नेक और दूसरों की मदद करने वाला एक सकारात्मक सोच का व्यक्ति था । कुछ भी हो जाय वह कभी बुरा- सोचता तक नहीं था । उसकी सोच यह रहती थी कि जो हो रहा है अच्छे के लिए हो रहा है । जो भी होगा वह अच्छा ही होगा ।

 

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तीन कुरा

Ganga, Paudyal, गङ्गा पौडेल, pallawa,पल्लव

गङ्गा पौडेल

 अभिशेषलाई बिरामी हजुरआमा छोडेर स्कुल जानै मन लागेन । उस्ले आफ्नी आमासँग सोध्यो “आमा ! आज म स्कूल जान्न है -”
“किन नजाने – दिनभरी हल्लेर बस्न -” प्रति प्रश्न गरिन् अमिलाले ।
“हैन आमा घरमा बसे पनि लेखेर पढेर बस्छु” अभिषेकले भन्यो ।
“उसो भए तँलाई पैसा खर्च गरेर किन स्कुल भर्ना गर्नु पर्‍यो -” जङगीएर भनिन् तिनले अभिशेष नबोली हजुरआमाको कोठामा गयो र नजिकै बस्यो ।
हजुरआमाले नातीको कपाल मुसार्दै भनिन् “बाबु स्कुल नगएर किन यहाँ आको नी -”
“हजुरको माया लागेर आ को” अभिशेषले भन्यो ।
“हो र – कति लाग्छ नी मेरो माया – हजुरआमाले सोधिन् ।

 

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