विविध दोहावली “भारत माँ के लाल”

dr. Roopchandra, Shastri, Mayank, डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’, pallawa , पल्लव

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’’

निहित ज्ञान का पुंज है, गीता में श्रीमान।
पढ़ना इसको ध्यान से, इसमें है विज्ञान।।

जनता की है दुर्दशा, जन-जीवन बेहाल।
कूड़ा-कर्कट बीनते, भारत माँ के लाल।।

मामा शकुनि हो गये, बिगड़ गये हैं ढंग।
पक्षपात को देखकर, हुए भानजे दंग।।

 

Continue reading


रूपचन्द शास्त्रीका हिन्दी दोहेः

dr. Roopchandra, Shastr,i Mayank, डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’, pallawa ,  पल्लव

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’’

(मुखपोथी (फेसबुक) पर मेरे कुछ दोहे)
बिना किसी सम्बन्ध के, भावों का संचार।
अनुभव करते हृदय से, आभासी संसार।।

जालजगत पर उमड़ता, दूर-दूर से प्यार।
अच्छा लगता है बहुत, आभासी संसार।।

बिना किसी हथियार के, करते हैं सब वार।
भय से होता मुक्त है, आभासी संसार।।

 

Continue reading


हिन्दी दोहे

dr. Roopchandra, Shastr,i Mayank, डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’, pallawa ,  पल्लव

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’,

(दोहे “करना राह तलाश” )
जब तक प्राण शरीर में, सभी मनाते खैर।
धड़कन जब थम जाय तो, सब बन जाते गैर।।

विधि के अटल विधान पर, चलता नहीं उपाय।
पंच तत्व की देह तो, माटी में मिल जाय।।

कालचक्र को देखकर, होना मत भयभीत।
जो आया वो जायगा, जग की है यह रीत।।

 

Continue reading


डॉ. राज सक्सेनाका पांच दोहे . . . . .

Dr., Raj, Kishor, Saksena, Saxena, Raj,राज किशोर सक्सेना ‘राज’, pallawa, पल्लव

राज किशोर सक्सेना ‘राज’,

गई कहाँ प्रतिस्नेह में, पगी-सधी वह बात ।
वाक-युद्ध संग चल रहे, अब तो घूंसे लात ।।

फिर से रोजा होगया, बिना माह रमजान ।
मिली न रोजी आज भी, भूखा है उस्मान ।।

जिन्दे, नेता नोचते, मरे नोचते गिद्द ।
‘राज’ रोग हैं देश के, नेता सकल प्रसिद्ध ।।

 

Continue reading