पूनम पंडित की हिन्दी कवितायें

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पूनम पंडित

पीली चूनर ओढ़ कर, मां धरा रही मुस्काय ।
पुलकित सबका मन भया, खुशी ना वरनी जाय ।

खुशी ना वरनी जाय, सभी मिल मोद मनायें ।
मां के आंचल से लिपट, झूमे और गायें ।

देख मात का रूप, सुधि भूला हर जन मन ।
बच्चों की किलकारियों से, गुंजित हुआ उपवन ।

 

अटखेलियां करते सभी, फिरें पंछी से उड़ते ।
मां प्रकृति के आंगन में, रहे मगन विचरते ।

बच्चों को खुश देखकर, मां वारी वारी जाय ।
पवन झकोले चल रहे, मां का आंचल लहराय।

पंछी भी कलरव करें, छेड़े मीठी तान ।
मुग्ध मगन झूमे सभी, गायें मीठे गान ।

मां धरती कहने लगी, ओ सुनो मेरी संतान ।
मुझसे तुम वादा करो, रखोगे मेरा मान ।

मेरी रक्षा का दायित्व, क्या तुम वहन करोगे ।
प्रदूषण कर दूर, पर्यावरण शुद्ध करोगे ।

धरती मां वादा करें, तुझसे तेरी संतान ।
तेरी रक्षा हेतु हम, नयौछावर कर दें प्राण ।

सुनके संकल्प धरा मां, मंद मंद मुस्काय ।
हर्षित सबका मन भया, खुशी ना वरनी जाय ।

पूनम पंडित (ग्रीन केयर सोसायटी )

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