पुनम पण्डित की सुन्दर हिन्दी मुक्तकें

Poonam, Pandit, पूनम पंडित, pallawa, पल्लव

पूनम पंडित

मन में यही प्रतिज्ञा लेकर सबको आगे आना है।
सबको मिलकर हिंदी भाषा को महकाना है।
आँच आने पाये ना माता के गौरव पर कभी ,
अपनी मातृ भाषा को और समृद्ध बनाना है।

संस्कृत की बेटी है, उर्दू की प्यारी बहना है।
प्यारी हिंदी भाषा सब भाषाओँ का गहना है।
आओ सब मिलकर, प्रण करो साथियो ,
हिंदी भाषा को जन – जन की भाषा बनाना है।

 

जैसे माता के माथे पर बिंदी सुन्दर लगती है।
वैसे ही भारत माँ के मस्तक पर हिंदी सजती है।
आओ सब मिलकर, संकल्प करो साथियो ,
प्यारी हिंदी भाषा को ”राष्ट्र भाषा” बनाना है ।

बावरा मन कहे, छू लू उड़के गगन ,
पर हैं बोझिल, रोके तन की थकन।
विवश मन तड़पता रहा रात दिन ,
पथ है दुर्गम मगर नहीं रुकते कदम।

बढ़ती जाये हर पल मंजिल की लगन,
अब तो बढ़ते ही जायेंगे आगे कदम।
मगन मन मचलता रहा रात दिन ,
इक दिन छू कर रहेगा नील गगन ।।

मनाते ईद और दीवाली साथ- साथ।
सजाते खुशियों की डोली , हर हाथ।
सतेन्द्र मनमोहन और शकील भाई !
मनाते हैं हरेक ख़ुशियाँ साथ- साथ।!

ख़ुशी या गम ,सभी मिलकर बाँटते हैं।
बहनों की डोलियाँ, सभी मिलकर सजाते हैं।
उर्स या रामलीला, सभी मिलकर मनाते हैं।
मनाते हैं सभी त्यौहार , सब साथ- साथ।!

अकबरी बुआ , हर अवसर पर आती हैं।
माँ और अम्मा संग बैठकर बतियाती हैं।
शाइस्ता और अफसाना सी प्यारी बहनें !
घूमने जाते हैं अक्सर हम साथ- साथ ।!

– पूनम पंडित
(ग्रीन केयर सोसाइटी)
मेरठ, यू. पी. भारत ।

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