“मावस का अंधेरा” मावस की अंधेर में

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कवयित्री कुमारी अर्चना

चकोर के आने इंतजार में
चाँद रात के द्वार पर खड़ा
कही निगल न लें अंधेरा! ये सब कुछ निगल लेता
पर कुछ पदचिन्ह नहीं छोड़ता
केवल अंधेरे के! किसी की खुशी को
किसी के अरमानों को
किसी के प्यार को
किसी के जहाँ को.. .. पहले चाँद को
धीरे धीरे खाता जाता
फिर चाँदनी को कैद़ करता
फिर सारे तारों की चमक
धूमिल कर देता है!

 


सच्चाई
इमान
शर्म़
आबरू
जान
इन्सानियत
व्यवस्था
आदमी की पेट
सब के सब उसकी गिरफ्त में! मावस है वो सूरज नहीं
जो सबको जीवन दें
अंधेरे को चीर दें
अंधेरा है केवल लेना जानता है
मेरा सब कुछ ले चुका
बस अब मुझे निगल लेगा
अपने अंधेरे में!
कोई इससे मेरा पता ना दो
मैं लापता हूँ
इसे जोर से कह दो
क्योंकि ये तेज सुनता है
सन्नाटे में भिन्नभिनाह़ट का
शोर बहुत होता
चाहे कोई कितना भी
बचाओ बचाओ आवाज़े देता
सारी अवाज़ बेसुरी हो जाती
बस सन सन सन
सुनाई देता..!
कुछ अँवारा व बदज़ात कुत्तों के
भौ भौ का स्वर भी!
सब कमरे में सोते हुए भी
जागते है पर कोई
अंधेरे में बाहर नहीं आता
शरीर तो जिंदा है पर
ज़मीर मर चुका
सड़ गल चुकी है
समाज वो व्यवस्थायें
जो भलाई का पाठ पढ़ाती थी
अब ये सबक उल्टा हो चुका है
बस अपने काम से काम रखों! आप भी याद रखो और मैं भी
इससे सुधरने की भूल ना करो
धीरे से निकल लो….
नहीं तो कहाँ मिलोगें पता नहीं! एक बहन को जबर्दस्ती
वेन में कुछ मनचले उठा लें जा रहे
गैंग रेप के बाद
इसी रस्ते पर फेंक देगें
जाने दो मेरी माँ,बहन व बेटी नहीं
कल पेपर में डिटेल पढ़ लेगें
और फोटो बाद सोशल मीडिया
पर अपलॉड
अपना मौलिक कर्तव्य निभा देगें! बीच रस्ते पर कोई जख्म़ी है
गाड़ी से ठोकर लगी शायद
मरने छोड़ चलो अब
पुलिस के चक्कर में पड़े तो
शामत आ जाएगी
उसकी किस्म़त अच्छी होगी तो
अस्पाल पहुँच जाएगा
और डॉक्टर बिना पुलिस रिपोर्ट लिखे
उसकी चिकित्सा करा दे तो
उसके परिवार वाले
फिर से देख लेगें
पुलिस को मालपानी खिला
व मंहगा अस्पाल का बिल
भर पाया तो
उसका अंतिम संस्कार हो जाएगा
नहीं शमसान जाने से पहले
किसी नरभक्षी के मुँह में चला जाएगा
कुछ आवश्यक अंग
किसी अमीर को लग जाएगें
या मानव तस्करी होकर
विदेश चले जाएगे
वही स्वीस बैंक में जमा हो जाएगें!
ग़र भूले से सरकारी अस्पताल गया तो
चिकित्सक व सुविधाओं की कमी से
मर जाएगा
एम्बुलेंस के अभाव में
कंधे पर या साइकिल में बंधा
समान रूप घर जाएगा
सफेदपोश सबसे पहले सांत्वना देने
पहुँच जाएगा!
मावस का अंधेरा बहुत धना है
कुहासे भी ज्यादा
इसलिए अभी तक हटा नहीं
पता नहीं कब तक
किस सदी तक रहेगा
ये अंधेरा !

कुमारी अर्चना
पूर्णियाँ,बिहार
२५/११/१७

 

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