हिन्दी गजल

Spread the love
Dr., Raj, Kishor, Raaj Saksena Raaj, राज किशोर सक्सेना ‘राज’, pallawa, पल्लव

राज किशोर सक्सेना ‘राज’

जिन्दगी कुछ इस तरह, अपनी बनाओ दोस्तों |
गम के तूफानों से लड़ , उस पार जाओ दोस्तों |

पूर्ण धरती और गगन, पाने को है उपलब्ध जब,
जिस तरह जितना मिले, अपना बनाओ दोस्तों |

देश की खातिर मरें हम, प्रण हमारे दिल में हो,
देश पर बलिदान हो , अमरत्व पाओ दोस्तों |

 

गम के बादल टूटकर बरसें तो मत हो गमजदा,
नाव खुशियों की इन्हीं में तुम चलाओ दोस्तों |

रो रहे हैं हालेदिल पर, लोग कितने ‘राज’, तुम-
जिस जगह जिस हाल में हो, मुस्कुराओ दोस्तों |

07 जनवरी, 17 – राज सक्सेना

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *