विनीत ठाकुर का मैथिली साहित्यः हाइकु

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विनीत ठाकुर

१)
सगरमाथा
सर्वोच्च हिमालय
धन्य नेपाल ।
२)
साँपक अण्डा
निकलय मुह सँ
सामना करी ।।
३)
देख गुलेठी
चतरल डारि सँ
पेरुकी फुर्र ।।

 


४)
ककरबिच्छ
मकरा के जाल मे
करे संघर्ष ।
५)
बन-जंगल
प्रकृति के श्रृंगार
विनाश रोकी ।।
६)
ऋतु वशंत
मजरल महुआ
गमके गाम ।।
७)
दिव्य हिमाल
पहिर श्वेत धोती
ठाढ अचल ।।
८)
नभ के उर्जा
सुरुजक लाली सँ
धरती स्वर्ग ।।
९)
वर्षाक बाद
इन्द्रधनुषी रुप
धन्य प्रकृति ।।
१०)
बथुवा साग
जमाइनक छौँक
स्वाद भरल ।।

विनीत ठाकुर
मिथिला बिहारी नगरपालिका
मिथिलेश्वर मौवाही – ३,
प्रदेश नं. २, धनुषा

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